उत्तराखंड

वीर शहीद केसरी चंद्र राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय में यूसीसी जागरूकता दिवस का आयोजन

डाकपथर, 22 जनवरी 2026।

वीर शहीद केसरी चंद्र राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, डाकपथर में यूसीसी (एक समान नागरिक संहिता) जागरूकता दिवस का भव्य आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम महाविद्यालय के छात्रों, शिक्षकों और एनसीसी कैडेट्स के बीच एक समान नागरिक संहिता के महत्व को समझाने के उद्देश्य से आयोजित किया गया, जो भारत के सामाजिक एकता और न्यायपूर्ण व्यवस्था को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
कार्यक्रम की शुरुआत महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. डी.एस. नेगी ने की। उन्होंने अपने उद्घाटन संबोधन में कहा कि यूसीसी न केवल कानूनी सुधार का माध्यम है, बल्कि यह सभी नागरिकों के बीच समानता और एकरूपता स्थापित करने का सशक्त कदम है। उन्होंने छात्रों से आह्वान किया कि वे इस संहिता को अपनाकर एक आधुनिक और समावेशी भारत के निर्माण में योगदान दें। प्राचार्य महोदय ने जोर देकर कहा कि उत्तराखंड में यूसीसी का कार्यान्वयन राज्य की प्रगति का प्रतीक बनेगा।
मुख्य वक्ता डॉ. अमित गुप्ता ने एक समान नागरिक संहिता की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, विकास यात्रा और वर्तमान संदर्भ में उसके महत्व पर विस्तृत व्याख्यान दिया। उन्होंने बताया कि यूसीसी संविधान के अनुच्छेद 44 से प्रेरित है और विवाह, तलाक, उत्तराधिकार जैसी व्यक्तिगत मामलों में समान कानून लागू करके सामाजिक असमानताओं को समाप्त करेगी। डॉ. गुप्ता ने आज की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि बहुलवादी समाज में यूसीसी लिंग न्याय और राष्ट्रीय एकता सुनिश्चित करेगी।
कार्यक्रम में डॉ. कृतिका नेगी ने यूसीसी पर अपना मत प्रकट करते हुए इसे महिलाओं के सशक्तिकरण का माध्यम बताया। उन्होंने कहा कि यह संहिता पारंपरिक रूढ़ियों को तोड़कर समान अवसर प्रदान करेगी। बीए छात्रा उज्जवल और एनसीसी कैडेट शिक्षा ने भी उत्साहपूर्वक अपने विचार साझा किए। उज्जवल ने युवाओं की दृष्टि से यूसीसी को प्रगतिशील कदम बताया, जबकि शिक्षा ने इसे सामाजिक सद्भाव का आधार माना।
इस अवसर पर महाविद्यालय के वरिष्ठ प्राध्यापक डॉ. राधेश्याम गंगवार, मीडिया प्रकोष्ठ के सदस्य डॉ. अविनाश भट्ट सहित बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहीं। कार्यक्रम का समापन धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ, जिसमें सभी ने यूसीसी के प्रति जागरूकता फैलाने का संकल्प लिया। यह आयोजन महाविद्यालय की सामाजिक जागरूकता अभियानों की एक कड़ी साबित हुआ।

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