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- Srinagar Garhwal स्थित Hemvati Nandan Bahuguna Garhwal University के चौरास परिसर में आयोजित कार्यक्रम में Anil Chauhan ने छात्र-छात्राओं से राष्ट्रीय सुरक्षा विषय पर विस्तृत संवाद किया। उन्होंने अपने संबोधन में प्राचीन भारतीय सामरिक परंपरा, चाणक्य नीति और आधुनिक युद्ध रणनीति पर विशेष जोर दिया।
- सीडीएस ने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत बनाने में समाज के सभी वर्गों की भागीदारी आवश्यक है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत में प्राचीन काल से ही सामरिक चिंतन और शोध की समृद्ध परंपरा रही है। धनुर्वेद, अर्थशास्त्र और चाणक्य नीति में सेना संचालन, कूटनीति और शक्ति संतुलन का विस्तृत उल्लेख मिलता है, जिसकी झलक आज भी भारत की विदेश नीति में दिखाई देती है।
- उन्होंने बताया कि मुगल काल के दौरान लंबे समय तक भारत की सामरिक सोच कमजोर हुई, लेकिन स्वतंत्रता के बाद देश ने धीरे-धीरे मानसिक और रणनीतिक मजबूती हासिल की। सीडीएस ने कहा कि मौलिक (ओरिजिनल) सोच और स्वदेशी रणनीति के बिना पूर्ण सफलता संभव नहीं है। यदि हथियार, नीति और युद्ध रणनीति स्वदेशी हों, तो परिणाम अधिक प्रभावी होते हैं।
- अपने संबोधन में उन्होंने राष्ट्रीय सुरक्षा के तीन प्रमुख घेरों की भी चर्चा की। पहला बाहरी घेरा कूटनीति, अर्थव्यवस्था और तकनीक से जुड़ा है। दूसरा मध्य घेरा रक्षा व्यवस्था से संबंधित है। तीसरा आंतरिक घेरा आत्मनिर्भरता, सैन्य संरचना और युद्ध योजनाओं के सफल क्रियान्वयन से जुड़ा हुआ है।
- सीडीएस ने कहा कि वर्तमान समय में युद्ध का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। अब पारंपरिक युद्धों के साथ-साथ साइबर वॉर, इंटेलिजेंस और सूचना आधारित युद्ध भी अहम भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने बताया कि भारत को परमाणु संपन्न पड़ोसी देशों, सीमा विवाद, आतंकवाद और आंतरिक अस्थिरता जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।
- उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि देश को दीर्घकालीन युद्ध तैयारी के साथ-साथ छोटे और स्मार्ट युद्ध मॉडल पर भी ध्यान देना चाहिए। कार्यक्रम के अंत में सीडीएस ने छात्रों के सवालों के जवाब दिए और उन्हें राष्ट्र निर्माण व आत्मनिर्भर भारत के लिए सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रेरित किया।
- कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रीय सुरक्षा, रणनीति और नेतृत्व पर गंभीर और सार्थक चर्चा देखने को मिली, जिससे छात्रों में देशसेवा और रक्षा क्षेत्र के प्रति नई प्रेरणा जागृत हुई।
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