राजनीती

छवि, काम और जनसंपर्क तय करेंगे टिकट: उत्तराखंड में भाजपा का नया चुनावी फार्मूला

उत्तराखंड में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। भारतीय जनता पार्टी ने साफ कर दिया है कि इस बार मंत्रियों और विधायकों को उनकी अपनी विधानसभा सीट पर किए गए कार्य और जनछवि के आधार पर परखा जाएगा। केंद्रीय नेतृत्व उत्तराखंड सहित विभिन्न राज्यों में मंत्रियों की लोकप्रियता का आकलन करने के लिए जल्द ही आंतरिक सर्वे शुरू करेगा।

पार्टी सूत्रों के अनुसार, मंत्रियों को अपनी वर्तमान विधानसभा सीट छोड़कर किसी अन्य सीट से चुनाव लड़ने की अनुमति नहीं दी जाएगी। संगठन का मानना है कि सीट बदलने से मतदाताओं में गलत संदेश जाता है और जिस सीट को मंत्री छोड़ते हैं, वहां नए प्रत्याशी के लिए चुनाव जीतना मुश्किल हो जाता है। वहीं, नई सीट पर पहले से दावेदारी कर रहे नेताओं में असंतोष पनपने की आशंका भी रहती है। पार्टी इसे दोहरा नुकसान मान रही है।

प्रदेश में पहले ऐसे कई उदाहरण रहे हैं जब विधायक या मंत्री चुनाव जीतने के बाद अगला चुनाव किसी दूसरी सीट से लड़ने पहुंचे, लेकिन इस बार संगठन इस प्रवृत्ति को सख्ती से रोकने के मूड में है। पार्टी ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि जो मंत्री जिस विधानसभा क्षेत्र से चुना गया है, उसे उसी क्षेत्र से दोबारा चुनाव लड़ना होगा।

भाजपा सरकार के मंत्रियों का मूल्यांकन उनकी क्षेत्रीय छवि और मंत्री पद के दौरान विधानसभा क्षेत्र को मिले लाभ के आधार पर किया जाएगा। लगातार तीसरी बार सत्ता में वापसी की चुनौती को देखते हुए पार्टी ने मूल्यांकन के पैमाने और सख्त कर दिए हैं।

न केवल मंत्री, बल्कि विधायकों के लिए भी आगामी विधानसभा चुनाव बड़ी चुनौती साबित होने वाला है। नए प्रदेश अध्यक्ष नितिन नवीन ने वरिष्ठ नेताओं को साफ संदेश दे दिया है कि किसी भी स्तर पर ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। आने वाले एक साल के भीतर विधायकों को अपने कामकाज और जनसंपर्क में स्पष्ट सुधार दिखाना होगा।

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