
देहरादून | महेन्द्र सिंह तोमर
जौनसार-बावर क्षेत्र के चार प्रमुख लोक त्योहारों में शामिल माघ मरोज पर्व को लेकर क्षेत्र में उत्साह का माहौल है। लोक आस्था, परंपरा और सामाजिक एकता का प्रतीक यह पर्व आगामी 11 जनवरी से एक माह तक बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया जाएगा। पर्व के अवसर पर दूर-दराज में रहने वाले ग्रामीण अपने पैतृक गांवों की ओर लौटने लगे हैं।
माघ मरोज पर्व की शुरुआत कयलू महाराज मंदिर में पारंपरिक धार्मिक अनुष्ठानों के साथ होती है। इसके बाद यह पर्व पूरे जौनसार-बावर क्षेत्र में मनाया जाता है। जैसे-जैसे पर्व नजदीक आ रहा है, तैयारियां भी तेज हो गई हैं।
पर्व को लेकर ग्रामीण इलाकों में बकरों की खरीदारी शुरू हो चुकी है। लोक परंपरा के अनुसार माघ मरोज पर्व पर बकरों की बलि दी जाती है, जिसके चलते बाजारों में खासी रौनक देखने को मिल रही है। विकासनगर, कालसी, साहिया, हरिपुर सहित आसपास के गांवों में ग्रामीण पर्व के लिए पहले से ही बकरे खरीद रहे हैं।
स्थानीय पशुपालकों के अनुसार पर्व के कारण बकरों की मांग में तेजी आई है। बाजार में अच्छे कद-काठी और स्वस्थ बकरों की कीमत 40 से 50 हजार रुपये तक पहुंच गई है, जबकि सामान्य दिनों में यही बकरे 10 से 20 हजार रुपये में उपलब्ध होते हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि माघ मरोज पर्व केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सामाजिक मेलजोल और पारिवारिक एकता का पर्व है। इस दौरान रिश्तों में प्रगाढ़ता आती है और पूरे क्षेत्र में उत्सव जैसा माहौल बन जाता है। पीढ़ियों से चली आ रही यह परंपरा आज भी जौनसार-बावर की सांस्कृतिक पहचान को जीवंत बनाए हुए है।





