उत्तराखंड

लाडपुर में श्रीमद्भागवत कथा का षष्ठ दिवस, रुक्मिणी विवाह प्रसंग ने भक्तों को किया भाव-विभोर

देहरादून (लाडपुर): लाडपुर स्थित दुर्गा निवास में आयोजित श्रीमद्भागवत महापुराण कथा के षष्ठ दिवस पर भक्ति, प्रेम और समर्पण का अद्भुत संगम देखने को मिला। कथा वाचक आचार्य शिव प्रसाद ममगाईं जी ने अत्यंत भावपूर्ण शैली में रुक्मिणी विवाह का पावन प्रसंग सुनाया, जिसे सुनकर श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे।

 

  • आचार्य जी ने अपने प्रवचन में बताया कि रुक्मिणी जी, जिन्हें देवी लक्ष्मी का अवतार माना जाता है, बचपन से ही भगवान श्रीकृष्ण को अपना पति मान चुकी थीं। किन्तु उनके भाई रुक्मी ने उनका विवाह शिशुपाल से करने का निर्णय लिया। ऐसी स्थिति में रुक्मिणी जी ने एक ब्राह्मण के माध्यम से भगवान श्रीकृष्ण को संदेश भेजा और उनसे अपनी रक्षा करने की प्रार्थना की।
  • उन्होंने मार्मिक शब्दों में वर्णन किया कि किस प्रकार भगवान श्रीकृष्ण ने समय पर पहुंचकर रुक्मिणी जी का हरण किया और उन्हें द्वारका ले जाकर विधिपूर्वक विवाह संपन्न किया। यह प्रसंग केवल एक विवाह नहीं, बल्कि भक्त और भगवान के पवित्र मिलन का प्रतीक है।

  • प्रवचन के दौरान आचार्य ममगाईं जी ने कहा कि रुक्मिणी जी की अटूट श्रद्धा, विश्वास और समर्पण हमें यह सिखाता है कि सच्चे मन से की गई भक्ति अवश्य ही भगवान तक पहुंचती है। उन्होंने बताया कि यदि जीवन में सच्चा प्रेम और अडिग विश्वास हो, तो सभी बाधाएं स्वतः समाप्त हो जाती हैं।

  • इस अवसर पर दुर्गा निवास में भजन-कीर्तन के साथ रुक्मिणी विवाह उत्सव बड़े ही हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। “राधे-श्याम” और “जय श्रीकृष्ण” के जयकारों से पूरा वातावरण गूंज उठा, जिससे श्रद्धालुओं ने अद्भुत आध्यात्मिक आनंद का अनुभव किया।
  • कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया और कथा के संदेशों को अपने जीवन में अपनाने का संकल्प लिया। षष्ठ दिवस का आयोजन भक्ति, श्रद्धा और सकारात्मक ऊर्जा से परिपूर्ण रहा।

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